0158 : आकाश और धरती के राजा की
आकाश और धरती के राजा की जय जय जय पुकार (2) सारी जमीन की सारी प्रजा, यीशु की जय जय जय पुकार (2) । 1. जीवन का रचने वाला वही भक्तों के दिल का उजियाला वही (2) पापिन कारण जन्मा वही (2) सूली पर चढ़ने वाला वही (2)। 2. वही है मेरे जीवन का मार्ग मेरा उद्धार और मेरी चट्टान 2 हाथों में है उसके किश्ती मेरी 2 आने दो, आता है गर यह तूफान 3. दु:ख में और सुख में वह साथी रहा राहों में जीवन के संग वह चला उसकी रही हम पर कृपा बड़ी(2) जीवन मिला तो उसी से मिला (2)