0151 : ऐ मेरे तारणहार ऐ मेरे पालनहार
ऐ मेरे तारणहार ऐ मेरे पालनहार धरती गगन पर्वत सागर चांद तारों के सृजनहार । को :सारी सृष्टि मिलकर गाती सृजनहार हो धन्यवाद (2) 1. सूरज की रोशनी से चंदा की चाँदनी से , पक्षी के हलचल से, आती है एक आवाज हर इन्सान और यह सारा जहां गाते रहे तेरा गुणगान , तूने बनाया हमें , तूने सजाया हमें । (2) 2. नदियों की कल कल से बारिश की रिम झिम से काली घटाओं से आती है एक आवाज, रचना सारी तेरे हाथों की करती महिमा और भक्ति थी तूने बनाया हमें ,तूने सजाया हमें