0097 : हो जय जयकार, जय जयकार करें
हो जय जयकार, जय जयकार करें(2) 1. स्वर्ग है उसका सिंहासन, सिंहासन, पृथ्वी बनी है आसन -आसन, आकाश उसकी महिमा बताते हस्त कला को दिखाते, सारी सृष्टि उसकी रचना उसका ही है प्रताप। 2. उस पर जिसका है भरोसा-भरोसा वह तो कभी न डरेगा-डरेगा, चाहे बिमारी, चाहे गरीबी चाहे हो आकाल, सब संकट से सब कष्टों से वह तो लगायेगा पार ।