0098 : क्रूस ही के पास जहाँ खून बहा
1. क्रूस ही के पास जहाँ खून बहा, दबके गुनाहों से मैं गया, खून से वहा ये दिल साफ हुआ उसकी हो तारीफ़। कोः- उसकी हो तारीफ, उसकी हो तारीफ, खून से वहा ये दिल साफ हुआ, उसकी हो तारीफ़। 2. दूर है गुणाह मेरे बिल यकीन, दिल मे अब है यीशु तख्त नशीन, क्रूस ही का गीत मुझको है शीरीन, उसकी हो तारीफ। 3. क्रूस का वह चश्मा है बेश-बहा, खुश हूँ कि मै उसके पास गया, खूब मुझको यीशु ने साफ़ किया, उसकी हो तारीफ। 4. आ देख ये चश्मा है साफ सफ्फा आ ताकि हो तेरे गुणाह मुआफ, आ इसी वक्त अभी होक तू साफ उसकी हो तारीफ़।