0033 : स्तुति हो यीशु तेरी हल्लेलुयाह!
स्तुति हो यीशु तेरी हल्लेलुयाह!(2) स्तुति हो तेरी कि तूने बचाया और किया है मुझको बरी। 1. जमा हुए है हम अब हल्लेलुयाह! गाते है मिलकर हम सब, तू ही हमारा है त्राता और दाता और तू ही हमारा है सब। 2. कीच से निकाला हमको हल्लेलुयाह! किया है तूने आज़ाद, स्तुति अब गायें हम सब क्यों न तेरी और हो जायें हम तेरे दास। 3. सारे फरिश्ते एक साथ हल्लेलुयाह! गाते है मिलकर हरदम, स्तुति वे करते हैं तेरी हमेशा और करते नहीं है विश्राम। 4. जायेंगे जब हम आसमान हल्लेलुयाह! गायेंगे मिलकर हरदम, बरबत बजाके आवाजें मिलाके हम गायेंगे सुबह और शाम।