0491 : स्वर्ग मेरा देश स्वर्ग मेरा घर
स्वर्ग मेरा देश स्वर्ग मेरा घर यहां परदेशी हूं सराय में रहता हूं मैं अब यात्रा में हूं कैसा शोभायमान है वह स्वर्ग मेरा देश सुंदर भी अनुपम है स्वर्ग मेरा घर चलते-चलते इस जग में मैं विश्वास ही से देखता हूं 1. सदा दूत मधुर गाते स्वर्ग में रहते बिना विश्राम लिए हुए स्वर्ग में गाते देखूंगा वहां उनको भी निश्चय में यह जानता हूं। 2. कब मैं जाऊं कब जाऊं त्राता के निकट उसको में कब देखूं मेरा प्रीतम वह सदा उसके साथ मैं रहूं यही दिल से चाहता हूं 3. अब मैं जल्दी जाऊं उस पार जहां मेरा घर यात्रा का अंत दिखता है स्थान वह मनोहर मुझसे पहले जो पहुंचे हैं मिलने को मैं जाता हूं 4. आनंद है सदा वहां यह है स्वर्ग धाम आदर शांति अद्भुत सुख जहां विराजमान शोक और दुख क्लेश होगा सब दूर अपने काम से विश्राम पाऊं