0380 : गिन गिन के स्तुति करूं
गिन गिन के स्तुति करूं बेशुमार तेरे दानों के लिये अब तक तूने संभाला मुझे अपनी बाहों में लिये हुए। 1. तेरे शत्रु का निशाना तुझ पर होगा न सफल, आँखों की पुतली जैसे वो रखेगा तुझे हर पल। 2. आँधियां बनके आये जिन्दगी के फिकर, कौन है तेरा खेवनहारा, है भरोसा तेरा किधर? 3. आये तुझे जो मिटाने वे शस्त्र होंगे बेअसर, तेरा रचनेवाला तुझ पर रखता है अपनी नज़र।