0359 : सारी सृष्टि के मालिक तुम्हीं हो
सारी सृष्टि के मालिक तुम्हीं हो, सारी सृष्टि के रक्षक तुम्हीं हो, करते है तुझको सादर प्रणाम, गाते हैं तेरे ही गुणगान। कोः- हा- हा हाल्लेलूयाह (7) आमीन 1. सारी सृष्टि को तेरा सहारा, सारे संकट से हम को बचाना तेरे हाथों में जीवन हमारा है, अपनी राहों पर हमको चलाना। 2. हम हैं तेरे हाथों की रचना, हम पर रहें तेरी करूणा तन-मन-धन हमारा तेरा है, इन्हें शैतान को छूने न देना। 3 अब दूर नहीं है किनारा, धीरज को हमारे बढ़ाना जीवन की हमारी इस नैय्या को भव सागर में खोने न देना।