0345 : जो क्रूस पे जाती है वह राह हमारी है
जो क्रूस पे जाती है वह राह हमारी है, वो क्रूस निशाना है, मंजिल वो हमारी है । 1. लंबा है सफर अपना बढ़ते ही जाना है, है ताज रखा आखिर उस ताज को पाना है, अब कसलो कमर अपनी शैतान से लड़ाई है। 2. दुनिया यह नहीं अपनी सब कुछ बेगाना है, कुछ रोज़ यहाँ रहना फिर छोड़के जाना है, रहबर वह हमारा है पहिचान पुरानी है । 3. दुख दर्द बहुत इसमें है जुल्म ओ सितम सहना, हम दम वह हमारा है रंजीदा नहीं रहना, आता है कोई देखो, यीशु की सवारी है। 4. रखता है मुहब्बत जो दुनिया से किया उसने, मंज़ूर था मर जाना खुद क्रूस लिया उसने, क्या खूब मुहब्बत है यह प्यार रूहानी है।