0305 : करता हूं मैं तेरी चिंता
करता हूं मैं तेरी चिंता, तू क्यों चिंता करता हैं, आंसूओं की घाटियों में, साथ ना छोडू़ंगा तेरा। 1. मेरी महिमा तू देखेगा खुद को मेरे हाथों में दे दे, मेरी शांति मैं तुझको देता हूं चलाऊंगा हर दिन मेरी कृपा में। 2. सभी तुझको भूलेंगें तौभी, क्या मैं तुझको भूलूंगा कभी, अपने हाथों में तुझे उठाकर, चलाऊंगा हर दिन इसी जहान में। 3. अब्राहम का मै परमेश्वर हूं, अद्भुत कार्य क्यों ना करूंगा, लाल सागर में रास्ता दिया आज भी मैं करने के योग्य हूं।