0304 : सहारा मुझको चाहिये
सहारा मुझको चाहिये, सहारा दे मुझे खुदा, मुझे सम्भाल मैं गिरा। (2) 1. कठिन है रास्ते बहुत, हर एक मोड़ पर खतर, अन्धेरे सायों को हटा, दिखा दे मुझको अब सहर । 2. ज़हाँ के रास्तों पे मैं, अकेले चल न पाऊंगा, अगर जो चलना चाहूं भी फिसल के गिर मैं जाऊंगा। 3 .ये बोझ जो गुणाहों का, मैं लेके आज चल रहा, उठाएगा अगर कोई, वह तू ही तो है ऐ खुदा।