0107 : कलवरी पर यीशु मुआ
कलवरी पर यीशु मुआ (2) वहाँ जीवन का सोता बहा, वहाँ जीवन का सोता निकला, पापी प्यास तू अपनी बुझा। 1. उसके पंजर में भाला छिदा, उसके हाथों में कीलें ठुकी, उसने क्या – क्या न दुख सहा। 2. उसके लहू से ले तू नहा, साफ होंगे तेरे गुनाह, वह सबके लिए है बहा। 3. वह सूली पर है चढ़ गया, कहा उसने कि पूरा हुआ, द्वार मुक्ति का खोला गया। 4. हे धर्मियों तुम भी आओ, हे पापियों तुम भी आओ, उसका खून सबके लिए है बहा।