0101 : यहोवा को धन्य कह मेरे मन
1. यहोवा को धन्य कह मेरे मन, उपकार कोई भी भूले बिन अधर्म सारे क्षमा करता है वह, सब रोगों को भी चंगा करता। कोः- कैसे कहूं तेरा धन्यवाद, मन मंदिर के स्वामी फैसला है दिलो जान से क्रूस प्रेम का भारी ऋण। 2. अशुद्ध कोड़ी मैं अपनों से दूर, खुद से भी थी मुझे नफरत जोरावर हाथो से छुआ मुझे शिफा दिया तूने हल्लेलूयाह। 3. बरतिमाई जैसे ताने सुनके, ज़माने से मुझे आसरा नज़र दिया मुझे रहम दिल से, हरदम कहूं तेरी ही महिमा। 4. गुणाहों का बोझ और तंगी हाल में, पत्थर मारते ये कपटी लोग यीशु ने ही मुझे माफी दी, हर्ष के आंसू से आराधना।