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0069 : मन मन्दिर में बसने वाला

मन मन्दिर में बसने वाला यीशु तू है निराला। 1. जिसके मन में तू जन्म ले, अविनाशी आनन्द से भर दे, आदि अनन्त और प्रीति-रीति की, जल जायेगी ज्वाला। 2. मूसा को तू ने पास बुलाया, स्वर्गलोक का भवन दिखाया, महापवित्र स्थान में रहकर, आप ही उसे संभाला। 3. पाप में दुनिया डूब रही थी, परम पिता से दूर रही थी, महिमा अपनी आप ही तजकर, रूप मनुष्य ले आया। 4. प्रेम हमें अनमोल दिखाया, प्रेम के खातिर रक्त बहाया, क्रूस पर अपनी जान को देकर, मौत से हमें छुड़ाया। 5. हर विश्वासी प्रेम से आये, खुशी से अपनी भेंट चढ़ाएं, अन्धकार अब दूर हुआ है, मन में हुआ उजाला ।