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0067 : सुन्दर तारक है

सुन्दर तारक है, परम आनन्द कारण है, यीशु मसीहा सा कोई प्रेमी नहीं कोई नहीं यहां रे। 1. कर्मेल की कीर्ति वही मेरे प्राणों से प्यारा वही, मेरे सिर पर वही प्रेम पताका है तूने जो फहराई है। 2. आदि और अन्त भी तू पाप रोग विदारक तू, प्रेम पयोनिधे कैसे श्रय मिला पातकी को मिला रे। 3. तेरे यहां पर अदल बदल बिलकुल नहीं महिमा धाम जहां वहां आगमन लो मेरी कामना तू ही सही।