0048 : अद्भुत क्रूस को निहारता जब
Tune: When I survey the अद्भुत क्रूस को निहारता जब जिस पर यीशु तू मुआ था, याद आता मेरे पाप का बोझ उतर गया मृत्यु द्वारा। 1. शरीर तेरा कुचला गया हाथ पांव दोनों छेदे गये, भाला पसली में छिद गया, कांटों का मुकुट सिर पर था। 2. उस दर्द को कैसे जानू वह थे सब पाप की वजह से, मृत्यु का दण्ड जो मेरा था उठा लिया वह यीशु ने। 3. दुनिया सारी उपहार समान अगर मैं दूं वह कुछ नहीं, अद्भुत और दिव्य तेरा प्रेम सारा जीवन तुझको अर्पण।