0018 : यहोवा चरवाहा मेरा
यहोवा चरवाहा मेरा कोई घटी मुझे नहीं है, हरी चराईयों में मुझे स्नेह से चराता वह है । 1. मृत्यु के अन्धकार से मैं जो जाता था, प्रभु यीशु करुणा से तसल्ली मुझे दी है। 2. शत्रुओं के सामने मेज़ को बिछाता है, प्रभु ने जो तैयार की मन मेरा मगन है। 3. सिर पर वह तेल मला है अभिषेक मुझे किया है, दिल मेरा भर गया है और उमंड भी रहा है। 4. सर्वदा प्रभु के घर में करुंगा निवास जो मैं, करुणा भलाई भी उसकी आनन्दित मुझे करती है।