0017 : मेरे गीतों का विषय
मेरे गीतों का विषय तू मेरी आराधना, तेरी महिमा मुझ से होवे यह मेरी है कामना । 1.तुझको मैंने मेरे प्रभुजी जब से पाया है, तेरे अनोखे प्रेम के आगे शीश झुकाया है, तेरी महिमा गाने को जो साज उठाया है, गीत नया जीवन में मेरे तब से आया है, जीवन का हर पल अब मेरा, तू ही मुझको थामना । 2. तेरा वचन जो राहों में मेरी दीप सा जलता है, मेरे जीवन का हर पहलू उसमें ढलता है, तेरे वचन के द्वारा मुझको साहस मिलता है, वह तो कभी न भटकेगा जो उन पर चलता है, तेरे वचन को थामे रहूँ हो मेरी वह साधना । 3. वक्त चुनौती देकर पूछे, तुमसे बारम्बार यीशु मसीह को बनाया तुमने जीवन का आधार, सोचना होगा हर प्राणी को, क्या वह है तैयार, देखो शायद कल न आये करना न इनकार, एक दिन करना होगा, सबको उसका सामना ।