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0004 : प्रभुजी ने किया स्नेह में

प्रभुजी ने किया स्नेह में, अधम पापी का छुटकारा। 1. एकलौते को पाप निवारण, के लिए तूने अवनि में दिया, भेज दिया उस क्रूस को सहने, यही है स्तुति के योग्य। 2. पाप के मारे क्रोध को सहने, वालों पर तूने कैसी दया की, तेरे दुलारे पुत्र को सजा दी, अधम पापी को बचाया । 3 मेरे परमेश्वर मेरे परमेश्वर, तूने मुझे क्यों छोड़ दिया है, ऐसी पुकारों को भी नकारा, अधम पापी को विचारा । 4. क्रूस पर प्राण की आहुति करके त्राण किया परम पातकियों का, घोर मरन के भीकर भय से, प्रभु ने हमें छुड़ाया । 5. हमको पिता के समक्ष में स्मरने के लिये यीशु मलिकी-सिदेक के, क्रम में है याजक पद में उसी को, समस्त गण भजेंगे। 6. यीशु मसीह है राजाधिराजा बादलों पे वह शीघ्र पधारे ईष्ट जनों को लेवेगा नभ में हाल्लेलूयाह गीत गाएं।