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0003 : परमात्मा वन्दना सुन्दरानन

परमात्मा वन्दना सुन्दरानन, नर लोक में तू आ गया जीवपालक! 1. संकट को तूने सहा कैसे बेमिसाल, ऐसे भयानक क्रूस पर तूने जान दी । 2. निन्दित होके लोक की घोर निन्दया, तूने सभी कैसे सहा यीशु प्रेमवान। 3. दीन जनों के हेतु यह सर्व दीनता, कैसे महान तू दीनित हो गया दयाल। 4. धूलों में हम जो रहे निन्दितों की यह, श्रेष्ठ पद कहाँ से है यीशु वन्दित। 5. ऐसी महान कृपा का मैं पात्र न रहा, तूने महान दया करी जीवदायका। 6. ज्ञान परम वैभव सारे जीवद, सारे मिलने योग्य है तू दयानिधे। 7. सुन्दर पद पंकज है समाश्रय, उस में युगों रहेंगे हम सुन्दराधिप।