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ऐ मसीह तुमसे अरमान करूँ
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ऐ मसीह तुमसे अरमान करूँ,
अपने जिस्म को कुर्बान करूँ ।
1. मेरा चलना,बोलना और
हर ख्याल तुमको भाए
मेरी सूरत ऐ मसीहा
तुमसी ही होती जाए
ऐसी ज़िंदगी अरमान करूँ ।
2. ना बनू मैं जमाने सा
पर मन बदलता जाए
मसीह हर दिन जिए मुझमें,
मेरा”मैं”नरता जाए
इच्छा जो हो तुम्हारी
उसको सुबह शाम करूँ ।