2050 : शिकारी आएगा जाल बिछाएगा
1. शिकारी आएगा जाल बिछाएगा खुद को छिपाएगा, पंख फैलाकर मैं उड़ूँगा और न डरूँगा। 2. शैतान आएगा जाल बिछाएगा खुद को छिपाएगा; उकाब की मानिन्द मैं उड़ूँगा और न डरूँगा।
1. शिकारी आएगा जाल बिछाएगा खुद को छिपाएगा, पंख फैलाकर मैं उड़ूँगा और न डरूँगा। 2. शैतान आएगा जाल बिछाएगा खुद को छिपाएगा; उकाब की मानिन्द मैं उड़ूँगा और न डरूँगा।