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2043 : पाँच थी रोटी मछलियाँ दो

पाँच थी रोटी मछलियाँ दो खिलाया पाँच हजारों को, पंक्ति – पंक्ति में बैठे जो, खाना परोसा लोगों को थी बाराह टोकरियाँ बच गई जो, महिमा प्रभु की दिखाने को। छोटे झुंड डरना नहीं वो प्रसन्न है तुमको राज्य देने को, बड़े – बड़े काम करोगे जो, खुद को उसके हाथों में सौंप दो, तुम दुनिया के छोर तक गवाह बनो, महिमा प्रभु की फैलाने को।