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1809 : देखो लीला रे सावरिये गी बाईड़ो

देखो लीला रे सावरिये गी बाईड़ो अजब निराली रे देखो लीला रे.... 1. प्रेम पण यीसू जगत बनाया प्यारा-प्यारा फूल भरा, मनुखा ने रूप आपणो दियो अजब निराली रे। 2. सोने जैसी काया रच दी सोनी मुरत बनाई रे, वारी दासा सारेयां ने सीस झुकाई रे।