1807 : चार दिनां को अठे पावणों
चार दिनां को अठे पावणों (2) आखिर पाछो जावे लो चैत सकै तो चेत बावला फैर घणो पछतावे लो। 1. भुलड़ा है सारा लोग चुणिया बाने थोड़ा जी, चुण्या होया न यीशु राजा साजे पासे बिठावे लो। 2. नदी किनारे लाग्यो बूटो सदा हरयो लहरावे लो, ना बिका पत्ता कुमलावे उभर फल लेयावे लो।