1222 : अमृत वेले पढ़िऐ वाणी
अमृत वेले पढ़िऐ वाणी, अमृत वेले सुनिऐ वाणी, मिल जाऐं जिन्दगी दा अमृत पानी। 1. सच्ची वाणी दा जो वी जाप करे, सब बुरियाईयां नू यीशु जी माफ करे, धन है ओ जिसने रब्ब नू पहचानी। 2. अमृत वेले ओ रब्ब जी मेरे, हरदम गावां गुण मै तेरे, उसने मैहरा दी छतरी तानी। 3. पानी दिया नदिया लई हिरनी तिहाई, उसने पीके ते प्यास बुझाई, दिल दियां जाने दिल दा जानी। 4. अपने खम्बा हेठा लवे संभाल ऐ, ओ मेरी ओट ओ मेरी ढाल ऐ, सुन सुन वाणी दिल च वसानी।