0746 : नया फिर दिन हुआ पुरानी रात का
नया फिर दिन हुआ पुरानी रात का करें सौ शुक्र हम खुदा की जात का 1. नफरत की हर आग बुझाके प्यार का दीप जलाएंगे, अपनी की तो बात है अपनी गैरों को अपनाएंगे, दौर लाएंगे नया -नया इक गीत गाएंगे नया । 2. हाथों की मेहनत बदलेगी कौम की तकदीरों को हम बदले डालेंगे घर की बदनुमा तस्वीरों को घर सजाएंगे नया,नया इक गीत गाएंगे नया । 3. हम सूरज,हम चाँद सितारे हम थो प्यार के वारे हैं इस दुनिया के रहने वाले हमको जान से प्यारे हैं प्यार देंगे हम नया,नया इक गीत गाएंगे नया ।