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0741 : गुनाह की राह पर फिर से

गुनाह की राह पर फिर से कभी जाया न करो अन्धेर पर कभी भी तुम यकीन लाया न करो (2) 1. कि गम मुसीबतों में ज़िंदगी चलेगी सदा (2) मसीह के नाम से हर पल यहाँ मुस्काया करो । 2. कदम तुम्हारे उठते गुनाह की राहों में (2) बचोगे आज नजर सूली पर उठाया करो । 3. किसे कहोगे यहाँ यार सब फरेबी हैं (2) मसीह है सच्चा उसे यार तुम बनाया करो ।