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0737 : तेरे दिल के द्वार पर

तेरे दिल के द्वार पर यीशु खटखटाता खोलो तुम दरवाजा वो है आना चाहता 1. बनना चाहता है वो हाँ हाँ तेरा ही मेहमान आज तेरे गम और फिकर वो उठाना चाहता । 2. नम्र आवाज से बोलता हाँ हाँ मुआ वास्ते तेरे छोड़ो बदसलूकी खोलो दर मैं आता । 3. तेरी खातिर मैंने हाँ हाँ पहिना ताज कटीला तुझको अब जलाली ताज पहनाना चाहता । 4. बेवाफ्फा न हो तू, हाँ हाँ मेरा खून खरीदा कर मेरा इकरार तू मुझसे क्यों शर्माता । 5. खोलता हूँ दरवाजा हाँ हाँ दिल का ऐ मसीहा आ और इसमें रह तू, मैं हूँ दिल से चाहता ।