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0485 : ऐ मसीह तुमसे अरमान करूँ

ऐ मसीह तुमसे अरमान करूँ, अपने जिस्म को कुर्बान करूँ । 1. मेरा चलना,बोलना और हर ख्याल तुमको भाए मेरी सूरत ऐ मसीहा तुमसी ही होती जाए ऐसी ज़िंदगी अरमान करूँ । 2. ना बनू मैं जमाने सा पर मन बदलता जाए मसीह हर दिन जिए मुझमें, मेरा”मैं”नरता जाए इच्छा जो हो तुम्हारी उसको सुबह शाम करूँ ।