0478 : पर्वतों को देखूँगा मैं
पर्वतों को देखूँगा मैं कौन है मददगार मेरा (2) मेरा मददगार खुदा है (2) जिसने जमीं और आसमां को बनाया (2) 1. वो तेरे पाँव को, फिसलने नहीं देगा (2) खुदावन्द है तेरा जागा हुआ तुझे तन्हा न छोड़ेगा (2) मेरा निग़हबां खुदा है (2) जिसने जमीं...। 2. तेरी जां को बला, छू भी न पायेगी (2) ना गर्मी चाँद और सूरज की कभी, तुझको सताएगी (2) मेरा साहिबां खुदा है (2) जिसने जमीं...।