0437 : प्रभु का दर्शन पाके भाई
प्रभु का दर्शन पाके भाई, लग जो सेवा मे। 1. भारतवर्ष बुलावे तुझको , आ बचा मुझको , आत्माएं मरती देखोंहजारों पाप के सागर में। 2. क्रूस पर अपनी जान प्रभु ने जग के लिए दी, जगह है देखी हिन्द के लिए दी, उसके ह्रदय में। 3 बैठे बैठे साल गंवाये, नौ जवानी के, अभी भी करले प्रभु की सेवा, बाकी जीवन में। 4,चारों ओर अन्धेरा छाया रात आ पहुंची, जो कुछ है करना अभी तूकर ले दिन की ज्योति में। 5. प्रभु के लिए आत्माबचाने में तू जल्दी कर, फसल है पक्की पूले जमा कर, उसके खत्ते में।