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0433 : कितना सौभाग्यमय

कितना सौभाग्यमय, कितना आनन्दमय, मसीही जीवन है जग में, कितना अच्छा वो है, कितना भला वो है, मसीह यीशु हमारा प्रभु। 1. अच्छा मित्र वो है, अच्छा पालक वो है, यीशु जैसा और कोई और नहीं, (2) हर घड़ी, हर बातों में भलाई वह करता, उसके जैसा कोई दूजा नहीं। 2. क्रूस के राह पर, धैर्य से हम चले, चाहे क्लेश भी क्यों न आए, (2) सच्ची शन्ति हमें यीशु से मिलती है, जो हमारा अनन्त जीवन है।