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0384 : अनुग्रहकारी प्रिय प्रभुजी

अनुग्रहकारी प्रिय प्रभुजी, तेरी शरण में हम आते है, तन-मन-धन तुझको भेंट चढ़ाते, करते है तुझको साष्टांग प्रणाम। 1. हर दिन तू हमें आशीष देता, गिरने से हमको बचाके तू रखता, जीवन के इस लम्बे सफर में, तेरा वचन ही राह दिखाता। 2. संकट क्लेश तो आते रहेंगे, पर तेरा अनुग्रह काफी है हर पल, हम तेरे कदमों में चलते रहेंगे, जीत हमारी होगी आखिर जरूर। 3. सेवा यीशु से हमको मिली है, मिट्टी के बरतन लेकिन खजाना है स्वर्ग का, टूट जाए तौभी परवाह नहीं है, महिमा तुझको देते रहेंगे।