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0371 : मसीहा तेरी रहमत का

मसीहा तेरी रहमत का सहारा मुझको चाहिये, मेरी कश्ती भँवर में है किनारा मुझको चाहिये । 1. भटकती जा रही है ज़िन्दगी अनजान राहों में, मसीहा मेरी मंजिल का इशारा मुझको चाहिए। 2. ना जाने कब कहाँ पर जिन्दगी की शाम हो जाए, मेरी तकदीर का रौशन सितारा मुझको चाहिए।