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0356 : इस जग का मैं दीपक हूँ

इस जग का मैं दीपक हूँ जीवन ज्योति जला दूंगा। 1. दीपक हूँ मैं अपने घर का रोज जला ही करता हूँ, मैं जल जलकर अपने घर का अंधियारा दूर भगा दूंगा जीवन ज्योति जला दूंगा। 2. समाज, नगर भी ख्रिस्त बिना सोये से हैं अंधियारे में, मैं यीशु मसीह की ज्योति को हर कोने में फैलाऊँगा जीवन ज्योति जला दूंगा। 3. जो ज्योति मिली प्रभु से मुझको वह त्याग, प्रेम, सत सेवा की, मैं खुश होकर इस जीवन को बलिदान उसे चढ़ा दूंगा जीवन ज्योति जला दूंगा।