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0347 : तेरे सन्मुख शीश नवाते हैं जग के करतार

तेरे सन्मुख शीश नवाते हैं जग के करतार, डूबे हुओं को दे दो सहारा कर दो बेड़ा पार। 1. पाप के बादल सिर पर छाये घिरा हुआ तूफान, तुम बिन नैया कौन संभाले मेरे प्रभु महान, आके बचालो प्राण हमारे जग के खेवनहार। 2. जन्म के अंधे को दी आंखे, रोगी लिये बचाए, पाप क्षमा किए सब पापिन के मुर्दे दिये जिलाए, पापी हृदय हम भी लाये धो दो तारणहार। 3. सुन्दर पक्षी पर्वत सागर सबके सृजनहार, आके विराजो मन मंदिर में बन्दे करे पुकार, व्याकुल हृदय तुमको पुकारे, आजा तारणहार ।