0168 : पवित्र प्रभुजी मेरे
पवित्र प्रभुजी मेरे, स्तुति हो उद्धार के लिए। 1.अति ऊँचे स्थान पर प्रभु, सिंहासन पर जो तू है; महान है तेरी महिमा, वर्णन से बाहर वह है । 2.पाप का कोढ़ी जो मैं था, तू ने की मुझ पर दया; धोकर पाप के दागों को, पवित्र मुझे किया है । 3.अशुद्ध होठों से मैंने, जीवन कपट से बिताया; धोकर इस दोषी मुँह को, स्तुति का गीत दिया है । 4.छुटकारे का दाम जो दिया, मैं तेरी स्तुति करूँगा; हे कलवरी के प्रभु, सब से आदर के योग्य है । 5.आदर मैं तेरा करूँगा, आनन्द से सदा प्रभु; प्रशंसा तेरी करूँगा, सब से तू ही उत्तम है । 6.आँखों से तुझे देखुँगा, स्वर्ग के दूतों के मघ्य में; उद्धारकर्ता शीघ्र आ, आनन्द से बाट जोहता हूँ ।