0146 : जय प्रभु, जय प्रभु
जय प्रभु, जय प्रभु, जय-जय-जय हो, प्यार किया मुझ पापी को। 1. दुख में दिल जब टूट गया, आस का दामन छूट गया (2) तूने आँसू पोंछ दिए, और कहा मुझे अब ना रो। 2. जब लहरों ने घेर लिया, आशा ने मुख फेर लिया (2) जल काँपा, आंधी सहमी, तूने कहा अब शान्ति हो। 3. अब मैं तुझको जान गया, प्यार तेरा पहचान गया (2) छोड़ूँगा ना हाथ तेरा, आगे चाहे जो कुछ हो। 4. जय जयकार करो सब ही, हो प्रभु की स्तुति (2) मन मंदिर में आज सभी यीशु जी को आने दो।