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0141 : हे मेरे मन यहोवा को धन्य धन्य कहो

हे मेरे मन यहोवा को धन्य धन्य कहो जो कुछ भी मुझ मे है उस को धन्य कहो 1.वही तो तेरे अधर्म को क्षमा करता है तेरे सब रोग चंगा करता है हल्लेलूयाह -2 वही तो तेरे प्राण को , नाश होने से बचाता है। 2. सत्यनाश के गढ़े से मुझे निकाला दल – दल की कीच से मुझे उबारा हल्लेलूयाह -2 मेरे पैरों दृढ़ को किया है चट्टान पर खड़ा किया है । 3. हे यहोवा के दूतों उसको धन्य कहो हे सारी सृष्टि उसको धन्य कहो ,धन्य हो -2 उसके राज्य के सब स्थानों मे यहोवा को धन्य कहो।