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0137 : क्रूस पर, क्रूस पर है ये कौन

1.क्रूस पर, क्रूस पर है ये कौन लहू-लुहान, मेरा स्वामी,मेरा नाथ, मेरे खातिर देता जान। 2. इस महान प्यार को मैंने ठुकरा दिया इस महा-पाप को हे प्रभु तू कर क्षमा। 3. पाप से करने प्यार जाऊंगा अब मैं क्या तेरी सन्तान बन मैं प्रभु जीऊंगा। 4.आए क्लेश कितने भी,हानि को हर कहीं क्रुस के प्रेम को भूलूँगा मैं नहीं।