0132 : तू मेरा शरणस्थन, तू मेरा गढ़ है
1.तू मेरा शरणस्थन, तू मेरा गढ़ है, संकट में मेरा दोस्त, मेरा प्रभु। अराधना करू मैं पूरे दिल से, मै तूझे ढूँढूँगा सम्पूर्ण जीवन में तेरी सेवा करूंगा अपनी सारे चीजों से, मैं हूँ यहाँ .....3 2.उद्धार मेरा तू,मेरी चंगाई, संकट में सामर्थ्य है, मेरा प्रभु। 3. तू मेरा चरवाहा, सांत्वना है मेरा, छुपने का स्थान है, मेरा प्रभु।