0115 : आवाज प्रभु की सुनूंगा
आवाज प्रभु की सुनूंगा, जब वो मुझसे कहे, मधुर आवाज से कहे, धीमी आवाज से कहे। 1. तेरी भयंकर वाणी, मेघों के ऊपर है, प्रतापी प्रभु गरजता, मेघों के ऊपर जो रहे। 2. आंधियाँ जब चले, डर भय मुझमें आए तब तेरी प्यारी आवाज, ‘‘मत डर’’ मुझसे कहे। 3. हे प्रभु तू अब कह, तेरा दास जो सुनता है, नम्र और दीन बनकर, मानूंगा जो तू कहे।