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0113 : अनुग्रह को तेरे प्रभु

अनुग्रह को तेरे प्रभु, कैसे मैं वर्णन करूं समझ के बाहर तेरा प्रेम, कैसे बयां मैं करूं तेरी दया का जो पहना हूं ताज, तो गाऊँ उठाके आवाज मैं जो कुछ आज हूं, तेरे अनुग्रह से हूं। 1.तेरा फजल है खुदा, मरने से मैं जो बचा सदा की ये मौत हटा, दिया तूने जीवन नया। 2.न मेरे कोई गुण से, न मेरी अच्छाईयों से जो कुछ है मुझको मिला, तेरे अनुग्रह से ही।