0104 : मैं न भूल सकता
मैं न भूल सकता, सूली पर मेरा यीशु मसीह, खून में लथपथ था जहाँ मेरा यीशु मसीह। 1. जिस हाथ ने कोड़ी को छुआ, जिस पांव ने पानी पर चला, उस हाथ में उस पांव में, मैंने कांटे ठुकवा दिया। 2. जिस की आज्ञा से आंधी शांत हुई, जिस की वाणी में अंधे देख लिये, उस महान प्रभु ने अपनी जान को, मेरे खतिर कुरबान किया।