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0090 : प्रभु तेरी सृष्टि को क्या कहूं

प्रभु तेरी सृष्टि को क्या कहूं, लगती है कि जैसे दुल्हन, तेरे हाथों ने हमको संवारा है, तेरी सांसो ने जीवन दिया, महिमा हो तेरी, महिमा हो। 1. बनाया है तूने हमको प्रभू, अपने ही स्वरूप में, तेरी प्रशंसा महिमा के गीत, गाता ये मेरा मन, आराधना तेरी आराधना। 2. आकाश तेरी महिमा बताए, हस्तकला को दिखाए, उड़ते पंछी नीले गगन में, गाते है हरदम भजन, धन्य है तू धन्य है।