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0084 : यीशु का प्रेम है, जीवन का आधार

यीशु का प्रेम है, जीवन का आधार, महासागर से भी है गहरा जीवन करता पार। 1. प्रेम जगत में आया पाप का बोझ उठाया, प्रेम में उसके अमृत जीवन जिससे मिले उद्धार। 2. जिसने प्रेम ये पाया उसमें छल ना माया, दिल की वीणा गूंजे स्वर में, प्रेम का बजता तार। 3. प्रेम कणक और मोती नवजीवन की ज्योति, प्रेम के इन रत्नों से आओ अपना करें श्रृंगार।