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0057 : बोलो जय मिलकर जय

बोलो जय मिलकर जय बोलो जय यीशु की जय (2) बोलो जय जय जय। 1. प्रेम की तेरी यही रीत, मन में भर दे अपनी प्रीत, तेरे प्रेम के गाऐं गीत। 2. क्रूस पर अपना खून बहा, मुझ पापी को दी शिफा, मन मेरे तू बोल सदा। 3. तेरी कुदरत की यह शान, खुद ही दाता खुद ही दान, पूरे कर मन के अरमान। 4. खिदमत अपनी ले मुझसे, इस मन्दिर में तू ही बसे, जग में तेरा नाम रहे।