0042 : आदि और अन्त तू ही है
1. आदि और अन्त तू ही है अल्फा और ओमेगा तू ही है, दूतों की स्तुति भी तू ही है बुद्धि और सब ज्ञान तू ही है, कोः-यीशु तू महान है,यीशु तू अच्छा है, यीशु तू जिन्दा है,यीशु तू धन्य है दूतों की स्तुति भी तू ही है बुद्धि और सब ज्ञान तू ही है। 2. जीवन भरा पापों से मेरा, जग अन्धेरा और अशुद्ध सारा, मेरे पापों से बचाने को, मेरे लिए जीवन दिया है। 3. सारे गुनहगारों के लिये, अपना खून बहाया यीशु ने, खाई कोड़ों की मार भी, दी सलीब पर उसने अपनी जान। 4. वायदा किया है तू ने वायदा तू करता है पूरा वायदे के लिए आते है, बरकतों की बारीश अब उण्डेल। 5. न्याय करने आनेवाला है, न्याय के साथ राज्य करने को, धर्मियों को लेकर न्याय से सिंहासन पर राज करेगा। 43 W तू मेरे दिल का है अज़ीज़, या मसीह (3) तुझ बिन नहीं है कोई चीज या मसीह (3) तू मेरा राजा है यीशु बचाने वाला सतगुरु तन मन और धन का मालिक तू या मसीह (3) 1. हो दौलत दूसरे लोगों की या मसीह (3) तू सच्ची दौलत है मेरी, या मसीह (3) क्या फायदा होगा दौलत से जब मौत आये मेरे लिये, पुकारुंगा तब मैं तुझे। या मसीह (3) 2.रात दिन तुझी से हो बातचीत, या मसीह (3) हो दुआ हो या गाऊं गीत या मसीह (3) तू सबसे पहले और पीछे तसल्ली देता है मुझे, तू प्यारा है सब लोगों से। या मसीह (3)