0022 : मेरे जीवन का मकसद तू है
मेरे जीवन का मकसद तू है, मेरे जीने का कारण तू है, मैं जीऊं या मरुं, वो तेरे लिए है तू मेरा प्रभु। 1. पिछला सब भूलकर मैं आगे दौड़ा चलूं, जो मेरे लिए धन था उसको मैं त्याग दू, कि मैं पाऊं उससे पुरस्कार, दौड़ा मैं जाऊँ। 2. मुझ पर हुई है कृपा बेकार ना जाने दूं, जिसने मुझे है चुना उसकी ओर मैं बढ़ू, देखूं तेरी सलीब पर, खींचा मैं जाऊं।